राष्ट्रभाषा एवं राजभाषा
हिंदी : चुनौतियाँ एवं समाधान
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राष्ट्र एवं राष्ट्रभाषा
तथा राजभाषा के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना का अभाव।
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अंग्रेज़ों के शासनकाल की
फाइलों में लिखित अंग्रेज़ी टिप्पण एवं पत्रों की भाषा का अंधानुकरण।
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अंग्रेज़ों के शासनकाल में
अंग्रेज़ी में तैयार किए गए नियमों, विनियमों, अधिनियमों आदि का वर्तमान में भी निरन्तर प्रयोग।
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मौलिक लेखन की कला का अभाव।
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राजभाषा हिंदी का अनुवाद
आधारित होना।
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पारिभाषिक शब्दों का
बनावटीपन।
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राजभाषा हिंदी के प्रयोग
संबंधी सरकारी आदेशों/निर्देशों के अनुपालन के प्रति उदासीनता।
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आम आदमी की शासन के प्रति भाषिक
अकांक्षाओं को नज़रअंदाज करना।
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सरकार और जनता के बीच
संवादहीनता का प्रमुख कारण प्रशासनिक भाषा है।
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राजभाषा हिंदी में कार्य करने
के लिए प्रशिक्षण एवं अभ्यास।
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सरकारी कार्यालयों में बातचीत
राजभाषा हिंदी में लेकिन कामकाज अंग्रेज़ी में।
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प्रशासनिक भाषा का तकनीकी
होना।
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कार्यालय में राजभाषा संबंधी
पदों का अभाव।
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सरकारी
अधिकारियों/कर्मचारियों को राजभाषा-नीति के प्रावधानों का पर्याप्त ज्ञान नहीं
होना।
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वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा
अपने अधीनस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने के प्रति प्रेरित
एवं प्रोत्साहित करने में उदासीनता बरतना।
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राजभाषा हिंदी के प्रति
विद्वेश का भाव होना।
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राजभाषा हिंदी को सहज रूप मे
विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले अनुवादकों को प्रशिक्षण का
अभाव।
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आशुलिपिकों और टाइपिस्टों को
हिंदी आशुलेखन और टाइपिंग का प्रशिक्षण।
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हिंदी आशुलेखन और हिंदी
टाइपिंग के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों का सदुपयोग।
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राजभाषा हिंदी का मौजूदा स्वरूप
अकुशलतापूर्वक अनुवाद का परिणाम है।
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कंप्यूटरों पर हिंदी में
कार्य करने की असुविधाजनक स्थिति।
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हिंदी में प्रवीणता प्राप्त
अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा हिंदी में कार्य करने के प्रति उदासीनता।
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राजभाषा-नीति कार्यान्वयन की
स्थिति की नियमित समीक्षा।
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स्तरीय और उपयोगी हिंदी पुस्तकों/शब्दकोशों/शब्दावलियों
आदि का अभाव।
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राजभाषा हिंदी के प्रगामी
प्रयोग संबंधी तिमाही/छमाही/वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना।
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संसदीय राजभाषा समिति की
निरीक्षण प्रश्नावली तैयार करना।
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हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़ा/माह
का सफल आयोजन।
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राजभाषा नीति के कार्यान्वयन
में जानबूझकर असहयोग करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए किसी दंड का
प्रावधान नहीं होना।
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