भारतीय समाज की 'एकजुटता' का असली चेहरा चुनावों में दिखाई देता है। लगभग सभी धर्म, संप्रदाय एवं समाज आदि अपना-अपना मंच सजाकर नेताओं को आमंत्रित कर खुश करते हैं। प्रत्येक कार्यक्रम में वे अपने-अपने समाज के लिए कुछ न कुछ चाहते हैं। यह कटु सत्य है कि हमारे देश के लोग अपने-अपने समाज को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, सत्ता किसी भी समाज को अत्यधिक लाभ पहुंचाती है, इसलिए चुनावी मौसम का फायदा उठाया जाता है। केवल आर्थिक हित ही एकमात्र ऐसा प्रभावी कारक है जो विभिन्न समाजों को एक-दूसरे से जुड़े होने की 'झूठी' तस्वीर पेश करता है।
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